Wednesday, 20 June 2018

#जम्मू_कश्मीर_में_राज्यपाल_शासन_क्यूँ ???

#जम्मू_कश्मीर_में_राज्यपाल_शासन_क्यूँ ???


जम्मू-कश्मीर को #धारा_370 के तहत विशेष राज्य का दर्जा प्राप्त है, राज्य में अलग संविधान है जिसके तहत यहां पर राष्ट्रपति शासन की बजाय राज्यपाल शासन लगाया जाता है।

जम्मू-कश्मीर में बीजेपी ने पीडीपी से गठबंधन तोड़ लिया है और सरकार से समर्थन वापस लेने की घोषणा कर दी है. ऐसे में वहां की सरकार अल्पमत में आ गर्ई है और बीजेपी ने राज्य में राज्यपाल शासन लगाने की मांग की है..

एक बात आपके दिमाग में जरूर आ रही होगी कि ऐसी स्थिति में देश के अन्य राज्यों में भारतीय संविधान की #धारा_356 के तहत राष्ट्रपति शासन लगाया जाता है लेकिन जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल शासन क्यों ?

दरअसल, जम्मू-कश्मीर के संविधान की #धारा_92 के मुताबिक, राज्य में संवैधानिक तंत्र की विफलता के बाद भारत के राष्ट्रपति की मंजूरी से 6 महीने के लिए राज्यपाल शासन लगाया जा सकता है.राज्यपाल शासन लगने के 6 महीने के भीतर अगर राज्य में संवैधानिक तंत्र दोबारा बहाल नहीं हो पाता है तो भारत के संविधान की धारा 356 के तहत जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल शासन के समय को बढ़ा दिया जाता है और यह राष्ट्रपति शासन में #तब्दील हो जाता है. अब तक जम्मू-कश्मीर में 7 बार राज्यपाल शासन लगाया जा चुका है.

#राज्यपाल_शासन_में :-
- जम्मू-कश्मीर के संविधान की धारा 92 (1) के तहत राज्यपाल राज्य के साथ सरकार के भी प्रमुख होंगे।
- प्रशासनिक अधिकारियों पर राज्यपाल का सीधा नियंत्रण होगा और  मुख्य सचिव की भूमिका बेहद अहम रहेगी।
- राज्यपाल राज्य की जरूरत के हिसाब से सलाहकारों की नियुक्ति करेंगे। सलाहकारों की राज्य प्रशासनिक परिषद (एसएसी) का गठन किया जाएगा।
- सलाहकार कैबिनेट मंत्रियों की तरह व एसएसी कैबिनेट की तरह कार्य करेगी। अलग अलग विषय के सलाहकारों को अलग विभाग मिलेंगे और वे विभाग संबंधी फैसले कर सकेंगे।
- राज्य की जरूरत से जुड़े सभी बड़े फैसले राज्यपाल की अध्यक्षता वाली एसएसी की बैठक में होंगे।
- राज्यपाल शासन अधिक से अधिक छह महीने तक का होता है। इसके बाद राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू होता है।
- राज्य की पॉलिटिकल पार्टियों के बीच सरकार बनाने पर आम राय बनने की स्थिति में राज्यपाल शपथ ग्रहण के बाद राज्यपाल शासन हटा सकते हैं।(संकलन).✍️$apna.🇮🇳

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